Login with OTP

Enter your mobile number to receive OTP

+91
Demo mode: OTP will be shown in response

Update Your Name

Install Guru Darshan app

Back

गुरु क्या है

जब किसी व्यक्ति के मन में यह भावना जागृत होती है कि तरह-तरह के अनुष्ठान, पूजा-पाठ, जप-तप करने के बावजूद भी मुझे जिस शांति की, जिस आनंद की चाह है वह नहीं मिल पा रही है, तो वह यह समझता है कि इस परम शांति और आनंद की, प्राप्ति के लिए गुरु की आवश्यकता है | तब वह पूरे विश्वास के साथ किसी गुरु के पास जाता है कि मुझे इनसे ज्ञान प्राप्त होगा और इनके द्वारा दिए गए साधन में जुट जाता है| पहली बार उनसे मिलने पर सोचता है कि ये मुझे अवश्य मेरे गंतव्य तक पहुंचाएंगे| कुछ समय तक उनके द्वारा दी गयी साधना करने के पश्चात् उसके विचार में गुरु की रूपरेखा कुछ इस प्रकार रहती है ---


<blockquote>गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वर: |
गुरुर्साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नम: || </blockquote>


गुरु को प्रारम्भ में शिष्य यह समझ पाता है कि यह ब्रह्मा है, यह सृष्टि कर्ता है, परन्तु और आगे बढने पर उसे यह महसूस होता है कि ये तो सिर्फ सृष्टि कर्ता ही नहीं हमारे पालन हार विष्णु भी हैं, और आगे जाकर यह समझ पाता है कि हमारा कल्याण करने वाले शंकर भी यही तो हैं परन्तु आगे यह पता चलता है कि गुरु की स्थिति तो इन सबसे ऊपर है वे तो परब्रह्म हैं और उन्हें प्रणाम करता है|

<blockquote>ध्यानमूलं गुरोर्मूर्ति: पूजा मूलं गुरु पदम् |
मंत्र मूलं गुरोर्वाक्यं मोक्ष मूलं गुरु कृपा ||</blockquote>

<strong>गुरु कृपा हि केवलम्|</strong>